आखिर शहडोल के जनप्रतिनिधियों को क्यों नहीं भा रहे एसपी-कलेक्टर, राजधानी में सिफारिशों का दौर, लेकिन तबादले की चर्चाएं रह जाती हैं बेकार...
शहडोल। कहते हैं, जब कोई अधिकारी सिस्टम में रहकर सख्ती से काम करता है, तो उसकी सबसे ज्यादा तकलीफ उन्हीं को होती है जो व्यवस्था से खिलवाड़ करने के आदी हैं। ऐसा ही कुछ इन दिनों शहडोल जिले में देखने को मिल रहा है, जहां जिले के एसपी और कलेक्टर प्रशासनिक ईमानदारी और सख्त रवैये के लिए चर्चाओं में हैं । मगर यही सख्ती अब जिले के कुछ जनप्रतिनिधियों और नेताओं को रास नहीं आ रही...
सूत्रों की मानें तो राज्य की राजधानी भोपाल में इन दोनों अधिकारियों के तबादले की सिफारिशों का दौर तेज़ी से चल रहा है। कई नेता और प्रभावशाली लोग लगातार अपने ऊपर तक के संबंधों का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि जिला प्रशासन की कमान बदली जा सके, लेकिन अब तक इन कोशिशों का कोई नतीजा नहीं निकला है। चर्चा यह भी है कि कलेक्टर और एसपी का अधिकारियों में नाम जुड़ना कुछ लोगों के गले नहीं उतर रहा, शायद यही वजह है कि उनकी हर छोटी-बड़ी कार्रवाई पर आपत्ति जताई जा रही है।
फिर चाहे वह भ्रष्टाचार पर नकेल कसने की कार्रवाई हो, अवैध खनन पर रोक लगाने का कदम हो या फिर राजनीतिक दबाव में काम न करने का संकल्प...
जिले में जनता का एक वर्ग जहां इन अधिकारियों की कार्यशैली की तारीफ कर रहा है, वहीं कुछ जनप्रतिनिधि और रसूखदार लोग उनकी सिस्टम से बाहर की राजनीति को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे, राजधानी में रोज नई सिफारिशें उठती हैं, लेकिन फाइलें वहीं की वहीं थम जाती हैं।जनता अब सवाल पूछ रही है। क्या ईमानदार अफसरों को हटाने की कोशिश ही राजनीति का नया चेहरा बन चुकी है।
शहडोल में फिलहाल अफसर बनाम नेता की यह खींचतान जिले की सियासत का सबसे गर्म मुद्दा बन गई है । और जनता देख रही है कि कौन सच में व्यवस्था चाहता है, और कौन अपने हितों की रक्षा...
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