क्या एक मां अपने अपराध को मंदिर की सीढ़ियों पर रखकर खुद को पवित्र मान सकती है? हनुमान मंदिर में भगवान के चरणों में मिली नवजात बच्ची...
शहडोल। क्या समाज का डर आज भी किसी को अपनी ही संतान छोड़ने पर मजबूर कर सकता है। माना जा रहा है कि लोकलज्जा, डर या पारिवारिक दबाव के चलते एक मां अपने मातृत्व को त्यागकर, अपनी ही कोख से जन्मी बच्ची को हनुमान जी के चरणों में छोड़ गई शायद यह सोचकर कि भगवान उसके इस पाप को क्षमा कर देंगे, एक सवाल जो हर दिल को चुभ रहा है।
क्या एक मां अपने अपराध को मंदिर की सीढ़ियों पर रखकर खुद को पवित्र मान सकती है?
बुढार थाना क्षेत्र में आज सुबह धनगंवा ग्राम स्थित हनुमान मंदिर में एक नवजात बच्ची भगवान के चरणों में लिपटी मिली, स्थानीय श्रद्धालु जब पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचे, तो उन्होंने मासूम की हल्की-सी रोने की आवाज़ सुनी, पास जाकर देखा, तो भगवान हनुमान की मूर्ति के पास एक नन्ही बच्ची सफेद चादर में लिपटी हुई थी, सूचना मिलते ही धनपुरी डायल 100 की पुलिस टीम मौके पर पहुंची और बच्ची को तत्परता से जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार बच्ची स्वस्थ है, लेकिन निगरानी में रखी गई है। वहीं, सोशल मीडिया पर बच्ची की तस्वीर वायरल हो रही है और लोग इसे हनुमान की कन्या कहकर संबोधित कर रहे हैं।
जिले के बुढार थाना क्षेत्र के ग्राम धांगवा रोड के किनारे स्थित हनुमान मंदिर में इस लोगो का हुकुम इकट्ठा हो गया जब मंदिर में के नवजात के रोने की आवाज सुनाया दी, लोग मंदिर में पहुंचे तो देखा कि एक नवजात बच्ची कपड़े में लिपटी मंदिर के चौखट पर रोती बिलखती पड़ी रही, सूचना मिलते ही धनपुरी डायल 100 की पुलिस टीम मौके पर पहुंची और बच्ची को तत्परता से जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार बच्ची स्वस्थ है, लेकिन निगरानी में रखी गई है। संभावना जताई जा रही है कि लोकलज्जा के डर से माता-पिता ने बच्ची को त्याग दिय, मगर जिस तरह से बच्ची को हनुमान मंदिर में छोड़ा गया, यह एक ओर जहां इंसानियत को शर्मसार करता है, वहीं यह आस्था का भी अनोखा उदाहरण बन गया, जैसे माता-पिता ने अपनी औलाद को भगवान के भरोसे सौंप दिया हो।बुढार पुलिस मामले की जांच में जुटी है। आसपास के गांवों और अस्पतालों में पूछताछ की जा रही है।
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