जय अम्बे ने निभाया रोजगार का नियम, 60% से अधिक स्थानीयों को काम; फिर क्यों रोकी गईं कंपनी की गाड़ियां
शहडोल। रामपुर-बटुरा ओपनकास्ट परियोजना में स्थानीय रोजगार को लेकर उठे विवाद के बीच निजी ठेका कंपनी जय अम्बे ने अपने स्तर पर नियमों के पालन और स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने की बात कही है। कंपनी का कहना है कि परियोजना में रोजगार को लेकर निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप 60 प्रतिशत से अधिक स्थानीय लोगों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार दिया जा चुका है। इसके बावजूद कोयला परिवहन में हस्तक्षेप से परियोजना के कामकाज और कंपनी को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
दरअसल, एसईसीएल सोहागपुर क्षेत्र अंतर्गत रामपुर-बटुरा ओसीएम में कोयला और ओबी उत्खनन का कार्य जय अम्बे द्वारा किया जा रहा है। इसी बीच अमलाई थाना क्षेत्र के रामपुर में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग सड़क पर उतर आए और कंपनी के कोयला लोड वाहनों को रोक दिया। वाहनों के रोके जाने से कोयला परिवहन प्रभावित हुआ और मौके पर कामकाज को लेकर तनाव की स्थिति बन गई।
जय अम्बे प्रबंधन के अनुसार, स्थानीय लोगों को रोजगार देने के मुद्दे पर कंपनी पहले से ही गंभीर है। कंपनी द्वारा नियमों के तहत स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता दी जा रही है और अब तक 60 प्रतिशत से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जा चुका है। ऐसे में लगातार वाहनों को रोकना और परियोजना के संचालन में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप करना उचित नहीं है।
प्रबंधन का कहना है कि कोयला लोड वाहनों को रोकने से परिवहन व्यवस्था बाधित होने के साथ कंपनी को प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान हो रहा है। इससे परियोजना का काम भी निर्धारित तरीके से संचालित करना मुश्किल हो जाता है।
कंपनी ने स्पष्ट किया कि रोजगार से जुड़े किसी भी मुद्दे का समाधान बातचीत और निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से किया जा सकता है, लेकिन परियोजना के काम और कोयला परिवहन को रोकना समस्या का समाधान नहीं है। प्रबंधन ने उम्मीद जताई कि स्थानीय स्तर पर संवाद के जरिए मामले का समाधान निकलेगा और रामपुर-बटुरा परियोजना का काम सुचारू रूप से जारी रहेगा।
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