आरके अर्थ रिसोर्स की चेतावनी के बाद भी नहीं जागा प्रशासन, जिसका नतीजा कंपनी में चली गोली बाल बाल बचे कर्मचारी, प्रशासन अब भी मौन...

@ajay.namdeo✒️
शहडोल । देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाने वाली निजी कंपनी आरके अर्थ रिसोर्स आज शहडोल के सोहागपुर कोयला अंचल में रोजगार और विकास की नई पहचान बन चुकी है। कंपनी न केवल कोयला उत्पादन को गति दे रही है, बल्कि स्थानीय बेरोजगार युवाओं को रोजगार देकर क्षेत्र की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण योगदान निभा रही है। लेकिन विकास की इस रफ्तार को कुछ दबंग, दलाल और कथित रसूखदार तत्वों की नजर लग गई है। कंपनी द्वारा पहले ही प्रशासन को संभावित हमले और हिंसक घटनाओं की चेतावनी दी गई थी, बावजूद इसके हालात लगातार बिगड़ते गए और आखिरकार रामपुर बटूरा में फायरिंग जैसी गंभीर घटना ने पूरे कोयला अंचल को दहला दिया,सोहागपुर का कोयला अंचल आज विकास और अपराध के बीच खतरनाक मोड़ पर खड़ा दिखाई दे रहा है।

शहडोल का सोहागपुर कोयला अंचल इन दिनों सिर्फ कोयला उत्पादन के लिए नहीं, बल्कि बढ़ती गुंडागर्दी, दलाली और सिंडिकेट राज के लिए सुर्खियों में है। खदानों में काम कर रही निजी कंपनियों पर कथित यूनियन नेताओं, राजनीतिक संरक्षण प्राप्त तत्वों और तथाकथित सामाजिक ठेकेदारों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं से हजारों रुपये की ‘कट मनी’ वसूली जा रही है, जबकि विरोध करने वालों को धमकियों और हिंसा का सामना करना पड़ रहा है।
रामपुर बटूरा मेगा प्रोजेक्ट में जय अम्बे कंपनी के दफ्तर में हुई फायरिंग ने पूरे कोयला अंचल को हिला दिया, इस घटना ने साफ कर दिया कि अब विवाद केवल वसूली तक सीमित नहीं, बल्कि खूनी संघर्ष का रूप ले चुका है। वहीं बकहो में आरके अर्थ मूवर्स के खिलाफ माहौल बिगाड़ने की कोशिश और अमलाई पुलिस द्वारा 25 लोगों पर कार्रवाई ने भी हालात की गंभीरता उजागर कर दी है।

सबसे बड़ा सवाल अब एसईसीएल सोहागपुर एरिया प्रबंधन, खासकर महाप्रबंधक बी.के. जेना की भूमिका पर उठ रहा है। लगातार बढ़ती अराजकता के बावजूद सख्त प्रशासनिक हस्तक्षेप दिखाई नहीं दे रहा। यदि समय रहते सिंडिकेट और दलाल नेटवर्क पर निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई, तो निजी कंपनियां खदान छोड़ सकती हैं, जिसका सीधा असर देश के ऊर्जा उत्पादन और बिजली व्यवस्था पर पड़ेगा...
सोहागपुर कोयला अंचल में जिस तरह निजी कंपनियों, खासकर आरके अर्थ रिसोर्स जैसी बड़ी कंपनियों को निशाना बनाया जा रहा है, वह केवल एक कंपनी पर हमला नहीं बल्कि पूरे विकास मॉडल पर चोट है। यदि रोजगार देने वाली कंपनियां असुरक्षित महसूस करेंगी, तो इसका सीधा असर स्थानीय युवाओं, क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और देश के ऊर्जा उत्पादन पर पड़ेगा, अब जरूरत सिर्फ कार्रवाई की नहीं, बल्कि ऐसे सिंडिकेट और दलाली तंत्र को पूरी तरह खत्म करने की है, ताकि उद्योग, रोजगार और विकास का पहिया बिना डर और दबाव के आगे बढ़ सके....

Comments

Popular posts from this blog

SECL बंगवार खदान में हड़कंप: सवेरिया मैनेजर ने कर्मचारियों को हाथ पकड़कर ऑफिस से बाहर फेंका, सर्वे दफ्तर में जड़ दिया ताला … कोयला उत्पादन ठप, कर्मचारियों का फूटा गुस्सा , मामला पहुंचा थाने...

497 अंकों के साथ शहडोल का बेटा प्रदेश में तीसरे स्थान पर...

सड़क पर खड़ी रहस्यमयी गाड़ी पर लगा व्हील लॉक: शहडोल में पुलिस की ज्वाइंट कॉम्बिंग गश्त से मचा हड़कंप...